उत्तराखंड

हरित ऊर्जा का नया मॉडल बनेगा उत्तराखंड, लागू हुई पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट नीति

उत्तराखंड सरकार ने राज्य की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को टिकाऊ तरीके से पूरा करने और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए उत्तराखंड पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट (पीएसपी) नीति लागू कर दी है। इस नीति के तहत प्रदेश में पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के विकास, आवंटन और संचालन के लिए पारदर्शी व्यवस्था तय की गई है।
पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के माध्यम से सौर और पवन ऊर्जा जैसी अनिश्चित प्रकृति वाली नवीकरणीय ऊर्जा को बेहतर तरीके से पावर ग्रिड से जोड़ा जा सकेगा। इसके साथ ही प्रदेश में उपलब्ध जल संसाधनों और स्टोरेज क्षमता के अधिकतम उपयोग पर भी जोर दिया गया है।
दो श्रेणियों में विकसित होंगी पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं
नीति के तहत पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं को मुख्य रूप से ऑन-स्ट्रीम और ऑफ-स्ट्रीम दो श्रेणियों में बांटा गया है।
ऑन-स्ट्रीम परियोजनाओं में कम से कम एक जल भंडारण व्यवस्था नदी के मुख्य बहाव वाले हिस्से में होगी। राज्य की अधिकृत एजेंसी समय-समय पर ऐसी परियोजनाओं की पहचान करेगी। सरकारी कंपनियों को परियोजनाएं नामांकन के आधार पर, जबकि निजी डेवलपर्स को प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से आवंटित किया जाएगा।
ऑफ-स्ट्रीम परियोजनाओं में जल भंडारण व्यवस्था नदी के मुख्य बहाव से अलग होगी। सरकार उपयुक्त स्थलों की पहचान कर डेवलपर्स को व्यवहार्यता और जल भंडारण क्षमता के आधार पर प्रस्ताव देने के लिए आमंत्रित करेगी। मूल्यांकन के बाद चयनित परियोजनाओं के लिए डेवलपर के साथ एमओयू किया जाएगा।
पांच साल तक ट्रांसमिशन चार्ज में बड़ी राहत
निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नीति में कई वित्तीय प्रोत्साहन दिए गए हैं। यदि परियोजना वित्तीय वर्ष 2033-34 के अंत से पहले चालू हो जाती है तो वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख से पांच साल तक राज्य के भीतर लगने वाले इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन चार्ज का 50 प्रतिशत से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा।
इसके अलावा जिन ऑफ-स्ट्रीम परियोजनाओं की बिजली राज्य सरकार स्वयं खरीदेगी, उन पर लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड लागू नहीं होगा। पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं से राज्य सरकार किसी प्रकार की मुफ्त रॉयल्टी बिजली भी नहीं लेगी।
पेयजल और सिंचाई में भी इस्तेमाल हो सकेगा पानी
पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं को केवल बिजली भंडारण तक सीमित नहीं रखा गया है। नीति में इनके बहुउद्देशीय उपयोग का प्रावधान भी किया गया है। आवश्यकता और संभावना के अनुसार परियोजनाओं में उपलब्ध पानी का इस्तेमाल पेयजल और सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा सकेगा।
निवेश के लिए बेहतर गंतव्य बनाने पर जोर
सरकार का मानना है कि स्वच्छ वातावरण, अपेक्षाकृत सस्ती और भरोसेमंद बिजली, जल संसाधनों की उपलब्धता और पारदर्शी भूमि आवंटन जैसी सुविधाओं के कारण उत्तराखंड ऊर्जा एवं औद्योगिक निवेश के लिए बेहतर गंतव्य बन सकता है।
इसके अलावा अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर के प्रभाव क्षेत्र और राज्य में मौजूद एकीकृत औद्योगिक क्षेत्रों से भी निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पंप्ड स्टोरेज नीति को राज्य में हरित ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और निजी निवेश को गति देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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