उत्तराखंड

Uttarakhand News: एम्स ऋषिकेश के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति और सीएम धामी हुए शामिल, 386 छात्र-छात्राओं को विभिन्न पाठ्यक्रमों में मिली डिग्रियां….

ऋषिकेश। देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की उपस्थिति में एम्स ऋषिकेश के 6वें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें सीएम पुष्कर सिंह धामी भी सम्मिलित हुए। इस दौरान संस्थान के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। साथ ही एम्स ऋषिकेश की विभिन्न उपलब्धियों पर आधारित पत्रिका रुद्राक्ष का भी विमोचन किया।

सत्यनिष्ठा और सेवा के मूल्यों से प्रेरित रहे

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि पिछले एक दशक में पूरे देश में नए AIIMS संस्थानों की स्थापना से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा तक पहुँच मज़बूत हुई है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहाँ इनकी कमी थी। मैंने इस बात पर ज़ोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक दायित्व है और राष्ट्र-निर्माण में चिकित्सा पेशेवरों की अहम भूमिका होती है। मैंने उनसे आग्रह किया कि वे निवारक देखभाल, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँच, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से अपना योगदान दें, और हमेशा सहानुभूति, सत्यनिष्ठा और सेवा के मूल्यों से प्रेरित रहें।

समाज सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे

सीएम धामी ने दीक्षांत समारोह में पदक एवं उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि आपके परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। आशा है कि आप सभी अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग करते हुए समाज की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। इस दौरान राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, पूर्व मुख्यमंत्री व माननीय सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र सिंह भट्ट मौजूद रहे।

इस दौरान एमबीबीएस (बैच 2019 सहित पूर्व बैच के 2 छात्र), बीएससी नर्सिंग (बैच 2021), एमडी/एमएस/एमडीएस (बैच जुलाई 2022 एवं जनवरी 2023), एमएससी नर्सिंग (बैच 2023), एमएससी. मेडिकल (बैच 2022), एमपीएच (बैच जनवरी 2024), डीएम/एमच. (बैच जुलाई 2022 एवं जनवरी 2023) और पीएचडी के विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई। “परीक्षाफल केवल अंक नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के परिश्रम और संकल्प का प्रतीक है। जिन विद्यार्थियों का परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, वे निराश न हों—आगे सुधार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं।”

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