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भारतीय बल्लेबाजों के लिए कहीं फिर चुनौती न बन जाएं शॉर्ट-पिच गेंदबाजी

पर्थ (ऑस्ट्रेलिया)। भारतीय टीम ने पर्थ के डब्ल्यूएसीए मैदान पर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पहले टेस्ट से पहले एक इंट्रा-स्क्वाड मैच खेला। मैच में कुछ खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, वहीं कुछ के लिए शॉर्ट-पिच गेंदों ने चुनौती खड़ी कर दी। मैच में केएल राहुल ने यशस्वी जायसवाल के साथ पारी की शुरुआत की।  राहुल ने शॉर्ट गेंदों के खिलाफ अच्छी तकनीक दिखाई, लेकिन प्रसिद्ध कृष्णा की बाउंसर से उनकी कोहनी चोटिल हो गई, जिसके कारण उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा। दूसरी ओर, यशस्वी ने आक्रामकता के साथ शुरुआत की, लेकिन जल्द ही स्लिप में कैच देकर आउट हो गए। विराट कोहली ने अपनी क्लास का प्रदर्शन करते हुए कुछ आकर्षक शॉट्स लगाए, लेकिन मुकेश कुमार की गेंद पर स्लिप में कैच थमा बैठे। शुभमन गिल ने 28 रन बनाए लेकिन शॉर्ट गेंदों के खिलाफ संघर्ष करते दिखे।
ऋषभ पंत, जिन्होंने शुरुआत में वादा दिखाया, थकावट के कारण संघर्ष करते नजर आए। नीतीश कुमार रेड्डी की शानदार गेंदबाजी ने पंत को बोल्ड कर दिया। गेंदबाजी विभाग में वाशिंगटन सुंदर और तनुश कोटियन ने अपनी कसी हुई गेंदबाजी से बल्लेबाजों को परेशानी में डाला। प्रसिद्ध कृष्णा और नीतीश रेड्डी ने शॉर्ट गेंदों के जरिए बल्लेबाजों की कमजोरी का फायदा उठाया। मैच के दूसरे चरण में यशस्वी और गिल ने बेहतर बल्लेबाजी की। यशस्वी ने नाबाद 52 रन बनाए, जबकि गिल ने 42 रन बनाए। कोहली ने भी संयम दिखाते हुए 30 रन जोड़े। बल्लेबाजों ने शॉर्ट गेंदों के खिलाफ अपनी तकनीक में सुधार किया।
मैच सिमुलेशन से यह स्पष्ट हुआ कि भारतीय बल्लेबाजों को शॉर्ट गेंदों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि, जायसवाल और गिल का प्रदर्शन टीम के लिए सकारात्मक संकेत है। रोहित शर्मा की चोट और राहुल की फिटनेस पर टीम प्रबंधन की नजर रहेगी। भारत को 2018 के पर्थ टेस्ट में मिली हार की यादें ताजा हैं। इस बार टीम का लक्ष्य मजबूत मानसिकता और तैयारियों के साथ मैदान पर उतरना होगा। पहला टेस्ट भारतीय बल्लेबाजों की तकनीक और धैर्य की कड़ी परीक्षा लेगा। इस अभ्यास मैच ने टीम की तैयारियों के मजबूत और कमजोर पहलुओं को उजागर किया।

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