
धामी सरकार का ‘मास्टरस्ट्रोक’: कार्यकर्ताओं के लिए खोला ‘सौगातों का पिटारा’
देहरादून 3 अप्रैल 2026: उत्तराखंड में लंबे समय से इंतजार कर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं और संगठन के समर्पित नेताओं के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी ‘पोटली’ खोल दी है। कैबिनेट विस्तार के ठीक बाद, सरकार ने राज्य के विभिन्न बोर्डों, निगमों, परिषदों और समितियों में खाली पड़े पदों पर नियुक्तियों की अधिसूचना जारी कर एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है।
एक के बाद एक नये दाइत्वधारियों के नाम आ रहे सामने
सरकार ने नैनीताल निवासी वरिष्ठ पत्रकार ध्रुव रौतैला को नियुक्त किया मीडिया सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष
टिहरी के विनोद सुयाल को युवा कल्याण सलाहार समिति में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी
चंपावत से मुकेश महराना को चाय विकास सलाहकार समिति में उपाध्यक्ष किया गया नियुक्त
कुलदीप सिंह बुटोला को उत्तराखंड राज्य स्तरीय खेल परिषद का बनाया गया अध्यक्ष
पूर्व प्रमुख और भाजपा के वरिष्ठ नेता ख़ेम सिंह चौहान को उत्तराखंड ओबीसी आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया
सरकार ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, टिहरी गढ़वाल सोना सजवाण को जड़ी-बूटी सलाहकार समिति में उपाध्यक्ष नियुक्त किया
चारु कोठारी क़ो बनाया गया राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद का उपाध्यक्ष
चम्पावत निवासी सुश्री हरिप्रिया जोशी को बनाया उत्तराखंड राज्य महिला आयोग में उपाध्यक्ष
बीजेपी वरिष्ठ नेता बलजीत सोनी क़ो बनाया गया अल्पसंख्यक आयोग का उपाध्यक्ष
सरकार ने चमोली निवासी भाजपा नेता प्रेम सिंह राणा को जनजाति आयोग में उपाध्यक्ष का दायित्व सौंपा….
अल्मोड़ा से गोविंद सिंह पिलखुवा को हथकरघा हस्तशिल्प विभाग में उपाध्यक्ष पद का मिला दायित्व
भाजपा उत्तराखंड की पूर्व प्रदेश मंत्री, काशीपुर की सीमा चौहान को (उपाध्यक्ष मत्स्य विकास अभिकरण) बनाया
संगठन में नई ऊर्जा का संचार:राजनीतिक गलियारों में इसे धामी सरकार की एक ‘सुविचारित रणनीति’ माना जा रहा है। 20 मार्च 2026 को हुए कैबिनेट विस्तार में पांच नए मंत्रियों को शामिल कर सरकार ने पहले ही क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है। अब, दायित्वधारियों की इन नियुक्तियों के जरिए जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुँचाने का प्रयास किया गया है।
निकाय चुनाव और मिशन 2027 की तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम आगामी नगर निकाय चुनावों और 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए संगठन को सक्रिय करने का एक अचूक तरीका है। शासन द्वारा जारी इन नियुक्तियों से न केवल लंबे समय से ‘उपेक्षित’ महसूस कर रहे नेताओं को सम्मान मिला है, बल्कि इससे पार्टी के भीतर होने वाली गुटबाजी और असंतोष पर भी विराम लगने की संभावना है।
मुख्य आकर्षण:
* कैबिनेट विस्तार के तुरंत बाद एक्शन: मंत्रिमंडल को उसकी पूर्ण क्षमता (12 मंत्री) तक पहुँचाने के बाद अब शासन का ध्यान रिक्त पदों को भरने पर है।
* समर्पण का सम्मान: संगठन के प्रति निष्ठावान नेताओं को महत्वपूर्ण समितियों और परिषदों में जगह देकर उनके संघर्ष को मान्यता दी गई है।
* रणनीतिक संतुलन: इन नियुक्तियों में कुमाऊं और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों के बीच एक संतुलित राजनीतिक आधार तैयार करने की झलक दिख रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कदम से यह साफ कर दिया है कि वह केवल ‘पॉलिसी’ पर ही नहीं, बल्कि ‘पॉलिटिक्स’ और ‘कार्यकर्ता कल्याण’ पर भी समान रूप से ध्यान दे रहे हैं। यह ‘सौगातों का पिटारा’ विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है, जो हाल ही में कुछ भाजपा नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने के बाद सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा था।



