उत्तराखंड में बदलेंगे बिल्डिंग बायलॉज: भूकंप ज़ोन-6 की श्रेणी में आने के बाद सरकार का बड़ा फैसला

उत्तराखंड में बदलेंगे बिल्डिंग बायलॉज: भूकंप ज़ोन-6 की श्रेणी में आने के बाद सरकार का बड़ा फैसला
देहरादून 25 फरवरी 2026: उत्तराखंड में अब मकान और व्यावसायिक भवनों के निर्माण के नियम पूरी तरह बदलने जा रहे हैं। राज्य के भूकंप ज़ोन-6 की अति-संवेदनशील श्रेणी में शामिल होने के बाद धामी सरकार ने ‘बिल्डिंग बायलॉज’ (Building Bylaws) में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इसके लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
CBRI निदेशक करेंगे समिति की अध्यक्षता
भवन निर्माण के मानकों को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए गठित इस 14 सदस्यीय समिति की कमान सीबीआई (CBRI) रुड़की के निदेशक प्रो. प्रदीप को सौंपी गई है। यह समिति भारतीय मानक ISO 1893-2025 के नए प्रावधानों के आधार पर राज्य के लिए सुरक्षित निर्माण तकनीक और नियमों का खाका तैयार करेगी।
क्यों पड़ी संशोधन की जरूरत?
हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो ने नए डेटा के आधार पर उत्तराखंड को भूकंप की दृष्टि से सबसे खतरनाक ज़ोन-6 में रखा है। वर्तमान में लागू बिल्डिंग बायलॉज पुराने मानकों पर आधारित हैं, जो इतनी तीव्रता वाले भूकंप को झेलने में सक्षम नहीं हो सकते। इसी जोखिम को देखते हुए मुख्य सचिव ने निर्माण शैली में आमूलचूल परिवर्तन के निर्देश दिए हैं।
समिति में दिग्गजों का जमावड़ा
संशोधन प्रक्रिया को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए समिति में देश और प्रदेश के नामी संस्थानों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है:
* संस्थान: सीबीआरआई रुड़की, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), और आईआईटी (IIT)।
* सरकारी विभाग: ब्रिडकुल (BRIDCUL), लोक निर्माण विभाग (PWD), सिंचाई विभाग, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग।
* अन्य: विभिन्न विकास प्राधिकरणों के अधिकारी और वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक।
क्या बदल सकता है आपके लिए?
इस संशोधन के बाद पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में भवनों की ऊंचाई, नींव की गहराई, पिलर की मजबूती और निर्माण सामग्री के इस्तेमाल को लेकर नए कड़े नियम लागू होंगे। विशेष रूप से बहुमंजिला इमारतों के लिए अब और भी सख्त ‘स्ट्रक्चरल सेफ्टी’ ऑडिट अनिवार्य किया जा सकता है।
“उत्तराखंड का ज़ोन-6 में आना एक गंभीर चेतावनी है। नए बायलॉज न केवल भविष्य के निर्माणों को सुरक्षित करेंगे, बल्कि पुरानी इमारतों की रेट्रोफिटिंग के लिए भी गाइडलाइन तय कर सकते हैं।”



