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“चुनौतियां बड़ी हैं, पर इरादे बुलंद! क्या नए पुलिस कप्तान के ‘सख्त एक्शन’ से पटरी पर आएगी देहरादून की कानून व्यवस्था ?

देहरादून 13 फरवरी 2026 :प्रमेंद्र सिंह डोबाल को देहरादून का नया एसएसपी नियुक्त किया जाना राजधानी की कानून व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। हरिद्वार जैसे चुनौतीपूर्ण जिले में सफल कार्यकाल के बाद, उनसे उम्मीदें काफी अधिक हैं।

देहरादून के नए कप्तान: प्रमेंद्र सिंह डोबाल के सामने ‘राजधानी’ की 5 बड़ी चुनौतियां होंगी।

देहरादून, जो न केवल उत्तराखंड की राजनीतिक राजधानी है बल्कि एक प्रमुख शैक्षिक और पर्यटन केंद्र भी है, वर्तमान में कानून व्यवस्था के मोर्चे पर कई जटिलताओं से जूझ रहा है। नए एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोभाल के लिए हरिद्वार का अनुभव काम तो आएगा, लेकिन देहरादून की तासीर और यहाँ के अपराध का स्वरूप थोड़ा अलग है।

1. बढ़ता अपराध ग्राफ और जघन्य हत्याएं

हाल के दिनों में देहरादून में हुई आपराधिक घटनाओं, विशेषकर दिन दहाड़े हत्याकांड जैसी वारदातों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े किए हैं। अपराधियों के बुलंद हौसलों को पस्त करना और जनता में ‘खाकी’ का इकबाल फिर से बुलंद करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी हाल ही में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर जोर दिया है, जिसे जमीन पर उतारना डोबाल के लिए बड़ी परीक्षा होगी।

2. नशे का जाल और ‘ड्रग फ्री देवभूमि’

देहरादून में युवाओं के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति एक गंभीर सामाजिक और सुरक्षा समस्या बन गई है। हाल ही में कैबिनेट द्वारा एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के लिए नए पदों को मंजूरी दी गई है। नए एसएसपी के लिए चुनौती यह होगी कि वे केवल छोटे पेडलर्स को ही नहीं, बल्कि राज्य के बाहर से चल रहे बड़े ड्रग सिंडिकेट्स की कमर तोड़ें।

3. ट्रैफिक का ‘चक्रव्यूह’

देहरादून की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक यातायात प्रबंधन है। स्मार्ट सिटी के निर्माण कार्यों और बढ़ते वाहनों के दबाव ने ट्रैफिक को अस्त-व्यस्त कर दिया है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने के बाद पर्यटकों की संख्या और बढ़ेगी। ऐसे में एक प्रभावी ट्रैफिक प्लान लागू करना और ‘बॉटलनेक्स’ को खत्म करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल होगा।

4. संवेदनशील मामले और सामाजिक सौहार्द

राजधानी होने के नाते यहाँ राजनीतिक और सामाजिक हलचलें तेज रहती हैं। हालिया ‘एंजेल चकमा’ जैसे संवेदनशील मामले और सांप्रदायिक तनाव की छिटपुट घटनाओं ने पुलिस की सतर्कता पर दबाव बढ़ाया है। डोभाल को न केवल अपराध रोकना है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को सुरक्षित रखते हुए अफवाहों पर लगाम लगानी होगी।

5. पुलिसिंग में सुधार और जवाबदेही

हरिद्वार में अपने कार्यकाल के दौरान डोबाल ने पुलिस विभाग के भीतर बड़े पैमाने पर फेरबदल कर कार्यक्षमता बढ़ाने की कोशिश की थी। देहरादून में भी उन्हें थानों और चौकियों के स्तर पर जवाबदेही तय करनी होगी। पुलिस कर्मियों का जनता के प्रति व्यवहार और एफआईआर दर्ज करने में तत्परता जैसे बुनियादी सुधारों पर उन्हें ध्यान देना होगा। प्रमेंद्र सिंह डोबाल का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि वे सख्त फैसलों के लिए जाने जाते हैं। हरिद्वार में कुंभ और कांवड़ जैसे बड़े आयोजनों को संभालने का उनका अनुभव देहरादून की चुनौतियों से निपटने में सहायक होगा। हालांकि, राजधानी की जनता अब बयानों के बजाय धरातल पर बदलाव देखना चाहती है।

 

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