मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से चिपको आंदोलन की सूत्रधार स्व. श्रीमती गौरा देवी के पुत्र श्री चंद्र सिंह राणा ने भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें सम्मानित किया। स्व. श्रीमती गौरा देवी के परिवारजनों को सरकार द्वारा ₹ 500001 की सम्मान राशि दी जा रही है। इस अवसर पर स्व. श्रीमती गौरा देवी के सुपौत्र श्री सोहन सिंह राणा भी उपस्थित रहे।
1973 में चिपको आंदोलन की वजह से केदारघाटी के हजारों पेड़ों को कटने से बचाया गया ।केदार घाटी के गॉंवों ने जंगलों को बचाने में अपनी अहम भूमिका निभाई थी ।चमोली जिले के रैणी गांव में गौरा देवी के नेतृत्व में गांव की कुछ महिलाओं ने चिपको आंदोलन की शुरुआत की थी, जब भी कोई पेड़ काटने आता था महिलाएं पेड़ से लिपट कर उसे कटने से बचा लेती थी इस तरह से इस आंदोलन का असर पूरी केदार घाटी में होने लगा तब अन्य गांव के लोगों ने भी इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और हजारों पेड़ों को कटने से बचा लिया गया। तरसाली गांव के दयानंद जंगल जाने वाले रास्ते पर शंख के साथ बैठे रहते थे जब भी कोई पेड़ काटने वाले या अनजान व्यक्ति जंगल की तरफ जाता था तो शंख बजाकर वह गांव के लोगों को संकेत दिया करते थे, शंख की ध्वनि सुनते ही गांव के लोग, महिलाएं जंगल में जाकर पेड़ों से चिपक जाया करती थी और उन्हें कटने से बचा लिया करती थी ।पेड़ों पर चिपकने की वजह से इस आंदोलन का नाम चिपको आंदोलन पड़ा ।
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