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केदारनाथ धाम: शीतकाल के लिए कपाट बंद होने की तैयारियां, भक्तों में उत्साह

केदारनाथ धाम: शीतकाल के लिए कपाट बंद होने की तैयारियां, भक्तों में उत्साह

रुद्रप्रयाग 22 अक्टूबर 2025:
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। हर साल की तरह इस वर्ष भी बाबा केदार के कपाट भैया दूज के शुभ अवसर पर, यानी 23 अक्टूबर 2025, गुरुवार को, सुबह 8:30 बजे बंद कर दिए जाएंगे।
भारी बर्फबारी और भीषण ठंड के कारण उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित यह धाम छह महीने के लिए श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया जाता है, जिसके लिए बद्री-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) और स्थानीय प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
मुख्य तैयारियां और धार्मिक अनुष्ठान:
* क्षेत्र रक्षक भैरवनाथ के कपाट बंद: केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने से पहले, परंपरानुसार क्षेत्र के रक्षक देवता भकुंट भैरवनाथ के कपाट विधि-विधान से बंद किए जाते हैं। यह प्रक्रिया इस वर्ष 18 अक्टूबर को संपन्न हुई।
* पंचमुखी भोगमूर्ति का सभा मंडप में विराजमान होना: कपाट बंद होने से कुछ दिन पहले बाबा केदार की पंचमुखी उत्सव मूर्ति को भोग लगाने और विशेष पूजा-अर्चना के बाद सभा मंडप में विराजमान किया जाता है, ताकि भक्त दर्शन कर सकें।
* समाधि पूजा: कपाट बंद होने के अंतिम दिन, सुबह के समय भगवान शिव की समाधि पूजा की जाएगी। इस दौरान बाबा केदार के स्वयंभू लिंग को भस्म, अनाज, फल, फूल, रुद्राक्ष, सफेद कपड़ा आदि से ढक दिया जाता है।
* गर्भ गृह और मुख्य द्वार बंद: समाधि पूजा के बाद, विधि-विधान से पहले गर्भ गृह का द्वार बंद किया जाता है, जिसके बाद परम्परानुसार सुबह 8:30 बजे मुख्य पूर्वी द्वार भी बंद कर दिया जाएगा।
शीतकालीन प्रवास और डोली यात्रा:
कपाट बंद होने के बाद, बाबा केदार की पंचमुखी उत्सव डोली भक्तों के जयकारों के साथ अपने शीतकालीन गद्दी स्थल के लिए प्रस्थान करेगी। यह डोली रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान होगी, जहां अगले छह महीने तक श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन और उनकी नित्य पूजाएं कर सकेंगे। डोली यात्रा 25 अक्टूबर को ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी।
श्रद्धालुओं में उत्साह:
कपाट बंद होने के इस महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से हजारों की संख्या में तीर्थयात्री केदारनाथ धाम पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया है, और प्रशासन द्वारा सुरक्षा तथा व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
इस तरह, बाबा केदार की यात्रा का यह चरण भैया दूज के साथ समाप्त होगा और अगले छह महीनों के लिए भक्तों का इंतजार शीतकालीन गद्दी स्थल ऊखीमठ में रहेगा।

NewsGrid Desk

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