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गीदम समिति ने रचा इतिहास, 38 वर्षों में सबसे अधिक कीमत पर बिका तेंदूपत्ता,10 हजार 909 रुपये प्रति मानक बोरा तक मिली रिकॉर्ड…..

रायपुर:  छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की गीदम प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समिति ने तेंदूपत्ता विक्रय में 38 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रच दिया है। 16 जुलाई 2026 को आयोजित ऑनलाइन निविदा में गीदम समिति के तेंदूपत्ते को 10,909 प्रति मानक बोरा तक का ऐतिहासिक मूल्य प्राप्त हुआ है।

दंतेवाड़ा जिले की प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समिति गीदम ने तेंदूपत्ता विक्रय में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा आयोजित ऑनलाइन निविदा में समिति का तेंदूपत्ता 10 हजार 609 रुपये और 10 हजार 909 रुपये प्रति मानक बोरा की रिकॉर्ड दर पर बिका। यह गीदम समिति के 38 वर्षों के इतिहास में तेंदूपत्ता विक्रय की सबसे अधिक कीमत है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे वनाश्रित परिवारों की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया और गुणवत्तापूर्ण कार्यप्रणाली का लाभ अब सीधे तेंदूपत्ता संग्रहकों तक पहुंच रहा है।

*करीब 4 हजार संग्राहक परिवारों को मिलेगा बोनस का लाभ*

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि तेंदूपत्ता रिकॉर्ड दर पर बिकने से समिति को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। इसका लाभ बोनस के रूप में समिति से जुड़े करीब 4 हजार तेंदूपत्ता संग्रहक परिवारों को मिलेगा। इससे वनाश्रित परिवारों की आय बढ़ेगी और उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।

*डिजिटल व्यवस्था से भुगतान में पारदर्शिता*

राज्य सरकार द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण, बोनस, छात्रवृत्ति, बीमा और अन्य लघु वनोपज योजनाओं में डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से संग्रहकों के बैंक खातों में राशि सीधे जमा की जा रही है। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध हुई है।

*सामूहिक प्रयासों से मिली ऐतिहासिक सफलता*

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि के लिए मुख्य वन संरक्षक, दंतेवाड़ा वनमंडलाधिकारी, जिला लघु वनोपज सहकारी संघ, समिति के पदाधिकारियों, फड़ मुंशियों और सभी अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से गीदम समिति ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वनाश्रित परिवारों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए लघु वनोपज के माध्यम से उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। आने वाले समय में भी तेंदूपत्ता और अन्य लघु वनोपज से जुड़े परिवारों को बेहतर आर्थिक लाभ दिलाने के प्रयास जारी रहेंगे।

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