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पर्यटन

बस्तर के नन्हे ललित की आंखों में लौटी रोशनी: जिला अस्पताल में हुआ जन्मजात मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन….

रायपुर: बस्तर के नौ वर्षीय बालक ललित मौर्य के जीवन में अब खुशियों का एक नया सवेरा हुआ है। जिले के विकासखंड बस्तर के अंतर्गत ग्राम पंचायत नदीसागर के आश्रित ग्राम पराली का निवासी ललित जन्म से ही मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहा था। इस जन्मजात विकार के कारण वह दुनिया की खूबसूरती देखने में पूरी तरह असमर्थ था और उसका बचपन अंधेरे के साये में बीत रहा था। हालांकि ललित के मोतियाबिंद की पहचान पूर्व में ही हो गई थी, लेकिन सर्जरी को लेकर मन में बैठे डर और संशय के कारण उसके परिजन ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं हो रहे थे।

ललित के उजाले की ओर बढ़ने का सफर 20 मार्च को बस्तर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित दिव्यांग सशक्तिकरण शिविर से शुरू हुआ, जहाँ वह दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने पहुँचा था। कलेक्टर श्री आकाश छिकारा की पहल पर आयोजित इस विशेष शिविर में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान नेत्र विशेषज्ञों ने ललित की स्थिति को समझा। इस दौरान पलारी के नेत्र सहायक अधिकारी श्री अनिल नेताम ने विशेष सक्रियता दिखाते हुए परिजनों को ऑपरेशन के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। उनके अथक प्रयासों और निरंतर दी गई समझाइश का ही परिणाम था कि परिजन अंततः सर्जरी के लिए राजी हुए, जिसके बाद ललित को तत्काल बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया।

जिला अस्पताल में हुआ जन्मजात मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन

कलेक्टर बस्तर श्री आकाश छिकारा के विशेष दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्वास्थ्य विभाग ने तत्परता दिखाते हुए इस केस को प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सेवा योजना और जिला प्रशासन के कुशल समन्वय से 24 मार्च को जिला महारानी अस्पताल जगदलपुर में डॉ सरिता थॉमस द्वारा ललित का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन संपन्न हुआ। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक, सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद और जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुमारी रीना लक्ष्मी के मार्गदर्शन में मेडिकल टीम ने इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को अंजाम दिया।

इस पुनीत कार्य में नेत्र सहायक अधिकारी कुमारी दिव्या पाण्डे, श्री सुंकर अमृत राव, श्री देवकरण व्यास सहित वार्ड इंचार्ज श्रीमती अन्नपूर्णा साहू और स्टाफ नर्स श्रीमती स्मृता कच्छ व नमिता मौर्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही ऑपरेशन थिएटर में सहायक श्री डोलेश्वर जोशी की सक्रियता ने इस पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाया। ऑपरेशन के बाद जब ललित की आंखों से पट्टी हटाई गई, तो उसके चेहरे पर आई चमक ने पूरी मेडिकल टीम की मेहनत को सफल कर दिया। अब ललित न केवल अपनी आंखों से दुनिया को देख पा रहा है, बल्कि अपने परिजनों और आसपास की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से पहचानने भी लगा है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस संवेदनशीलता ने एक मासूम के जीवन से अंधेरा मिटाकर एक परिवार के घर में उम्मीद का दीया जला दिया है।

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