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अंकिता भंडारी न्याय मार्च – सीएम आवास कूच- पुलिस से झड़प

 अंकिता भंडारी न्याय मार्च – सीएम आवास कूच- पुलिस से झड़प

देहरादून 4 जनवरी 2026

आज देहरादून में अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई (CBI) जांच की मांग को लेकर एक विशाल जनसैलाब उमड़ा। विभिन्न सामाजिक संगठनों, महिला मंचों और विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री आवास कूच किया।
1. प्रदर्शन का घटनाक्रम
* शुरुआत: प्रदर्शनकारी सुबह परेड ग्राउंड में एकत्रित हुए। यहाँ एक जनसभा हुई जहाँ वक्ताओं ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
* कूच: जनसभा के बाद हजारों की संख्या में लोगों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च शुरू किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर “अंकिता को न्याय दो” और “वीआईपी (VIP) का नाम उजागर करो” जैसे नारे लिखे थे।
* पुलिस कार्यवाही: पुलिस ने मुख्यमंत्री आवास से लगभग 2 किलोमीटर पहले बैरिकेड्स लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया।
* झड़प: जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स पार करने की कोशिश की, तो पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की (झड़प) हुई। पुलिस ने भीड़ को आगे बढ़ने से सख्ती से रोका।
2. प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखीं:
* CBI जांच: पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए।
* VIP का नाम: उस कथित “वीआईपी” का नाम उजागर किया जाए जिसके लिए अंकिता पर अनैतिक दबाव बनाया जा रहा था।
* सुप्रीम कोर्ट की निगरानी: प्रदर्शनकारियों की मांग है कि यह जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी सीटिंग जज की निगरानी में हो ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
* SIT जांच पर अविश्वास: वक्ताओं ने कहा कि एसआईटी (SIT) की जांच केवल “वीआईपी” को बचाने की कोशिश कर रही है, इसलिए उन्हें पुलिस जांच पर भरोसा नहीं है।
3. शामिल संगठन और दल
इस प्रदर्शन में समाज के हर वर्ग ने हिस्सा लिया:
* राजनीतिक दल: कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल (UKD), और वामपंथी दल।
* सामाजिक संगठन: उत्तराखंड महिला मंच, विभिन्न छात्र संगठन (NSUI आदि), और राज्य आंदोलनकारी।
* आम जनता: बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं और युवा भी स्वतः स्फूर्त होकर इस मार्च में शामिल हुए।
4. (ताजा विवाद)
यह प्रदर्शन हाल ही में वायरल हुए कुछ ऑडियो क्लिप्स और गवाहों के बयानों के बाद उग्र हुआ है, जिसमें कथित तौर पर वीआईपी के शामिल होने के संकेत मिले थे। हालांकि, पुलिस ने कल (शनिवार को) बयान जारी कर किसी भी वीआईपी की संलिप्तता से इनकार किया था, जिससे लोगों का गुस्सा और भड़क गया।
आज का प्रदर्शन यह बताता करता है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर जनता का आक्रोश कम नहीं हुआ है। प्रशासन द्वारा ‘वीआईपी एंगल’ को खारिज करने के बावजूद, जनता और विपक्ष अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और सीबीआई जांच से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं।

NewsGrid Desk

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