उत्तराखंड के देहरादून और हरिद्वार नगर निगम क्षेत्र को कचरा मुक्त शहरों के निर्माण के लिए देश के 50 चयनित शहरों में शामिल किया गया है। अब दोनों शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के स्तर से भी होगी। मंत्रालय के अधिकारियों को चयनित शहरों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। वे नियमित समीक्षा के साथ स्थानीय निकायों को तकनीकी मार्गदर्शन और हैंडहोल्डिंग भी उपलब्ध कराएंगे।
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत शुरू की गई इस पहल में 24 राज्यों के 50 शहरों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य शहरों में स्वच्छता व्यवस्था, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और नागरिक भागीदारी को बेहतर बनाना है। इसके लिए स्वच्छतम पोर्टल पर शहरों की प्रगति की निगरानी के लिए डिजिटल समीक्षा प्रणाली भी तैयार की गई है। मंत्रालय के अधिकारी संबंधित शहरों की प्रगति की नियमित समीक्षा करेंगे।
स्रोत पर कचरा पृथक्करण पर जोर
केंद्र की ओर से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत स्रोत पर ही कचरे के पृथक्करण को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अलावा निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (सीएंडडी) कचरे के लिए सेकेंडरी कलेक्शन सेंटर स्थापित करने की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की गई है। इससे तेजी से विकसित हो रहे देहरादून और हरिद्वार में निर्माण मलबे के अलग-अलग संग्रह और वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
शिकायत के लिए शुरू होगा व्हाट्सएप चैनल
स्वच्छता संबंधी शिकायतों को दर्ज कराने के लिए नागरिकों को भी नई सुविधा मिलेगी। मंत्रालय ने स्वच्छता से जुड़े मामलों की शिकायत सीधे दर्ज कराने के लिए समर्पित व्हाट्सएप चैनल शुरू किया है। इसके माध्यम से नागरिक कचरा और गंदगी से संबंधित शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।
इसके साथ ही जनजागरूकता और व्यवहार परिवर्तन के लिए स्वच्छता बिहेवियर चेंज डिजिटल कोष भी शुरू किया गया है। इसके तहत स्थानीय निकायों को स्वच्छता अभियान के लिए प्रचार सामग्री, रचनात्मक सामग्री और नवाचार से जुड़े संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।



