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1320 मेगावाट थर्मल पावर करार पर उठे सवालों का प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने दिया तथ्यात्मक स्पष्टीकरण

*1320 मेगावाट थर्मल पावर करार पर उठे सवालों का प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने दिया तथ्यात्मक स्पष्टीकरण*

*बिजली खरीद प्रक्रिया में नियम, प्रतिस्पर्धा और नियामकीय स्वीकृति का पूरा पालन—प्रमुख सचिव ऊर्जा*

*25 वर्षों की दीर्घकालिक बिजली जरूरत को ध्यान में रखकर 1320 मेगावाट बेस-लोड बिजली की व्यवस्था*

*अंतिम चयन प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर, किसी एक कंपनी को लाभ पहुंचाने का सवाल ही नहीं—डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम*

 

देहरादून 17 सितंबर 2026:1320 मेगावाट थर्मल पावर की प्रस्तावित बिजली खरीद प्रक्रिया को लेकर कुछ राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए सवालों पर प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने तथ्यात्मक स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों, तकनीकी आवश्यकताओं, प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया और उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) की स्वीकृति के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। बिजली खरीद का उद्देश्य किसी एक कंपनी को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि राज्य की दीर्घकालिक और बढ़ती बिजली आवश्यकता को सुरक्षित करना है।

प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा वर्ष 2019 में जारी Model Bidding Document एक सामान्य मॉडल दस्तावेज है। प्रत्येक विद्युत परियोजना की तकनीक, स्थान, ईंधन की उपलब्धता, परिवहन लागत तथा अन्य परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। इसी कारण निविदा प्रक्रिया के दौरान बोलीदाताओं से प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का तकनीकी एवं व्यावहारिक दृष्टि से परीक्षण किया गया। आवश्यक प्रस्तावित बदलावों को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) के समक्ष रखा गया और आयोग द्वारा विस्तृत विचार-विमर्श के बाद आवश्यक संशोधनों को मंजूरी दी गई।

*पांच कंपनियां RFQ चरण में योग्य, आगे भी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया*

डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि यह धारणा भी सही नहीं है कि बिजली खरीद का कार्य बिना प्रतिस्पर्धा के किसी एक कंपनी को दिया जा रहा है। Request for Quotation (RFQ) चरण में पांच कंपनियां योग्य पाई गईं। इसके बाद Request for Proposal (RFP) की प्रक्रिया में भी प्रतिस्पर्धा कायम रखी गई है। अंतिम चयन प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के दौरान प्राप्त कुल टैरिफ के आधार पर किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि 1320 मेगावाट बिजली की व्यवस्था राज्य की दीर्घकालिक बेस-लोड आवश्यकता को ध्यान में रखकर प्रस्तावित की गई है। इसका उद्देश्य भविष्य में राज्य के उपभोक्ताओं को लगातार, पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना है।

*देश में उपयुक्त स्थान पर संयंत्र लगाने का विकल्प, उत्तराखंड में संयंत्र लगाने पर भी कोई रोक नहीं*

प्रमुख सचिव ने कहा कि उत्तराखंड पर्यटन एवं तीर्थाटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य होने के साथ-साथ पर्यावरणीय रूप से भी संवेदनशील है। थर्मल पावर प्लांट के लिए बड़ी मात्रा में कोयले की आवश्यकता होती है। कोयले को लंबी दूरी तक पहुंचाने पर परिवहन लागत भी बढ़ सकती है। इसलिए निविदा में संयंत्र को देश में किसी भी उपयुक्त स्थान पर स्थापित करने का विकल्प रखा गया है, ताकि कंपनियां ईंधन की उपलब्धता, परिवहन लागत और अन्य व्यावहारिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रतिस्पर्धी दर प्रस्तुत कर सकें।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में संयंत्र स्थापित करने पर कोई रोक नहीं है। यदि कोई कंपनी उत्तराखंड में संयंत्र स्थापित कर प्रतिस्पर्धी दर पर बिजली उपलब्ध कराती है, तो वह भी निर्धारित प्रक्रिया में भाग ले सकती है।

*ट्रांसमिशन लागत की व्यवस्था निविदा और टैरिफ की शर्तों के अनुसार*

डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि बिजली जिस स्थान पर उत्पादित होगी, वहां से उत्तराखंड तक बिजली पहुंचाने के लिए आवश्यक ट्रांसमिशन व्यवस्था और उससे संबंधित लागत निविदा तथा टैरिफ की निर्धारित शर्तों के अनुसार तय होगी। इसलिए केवल यह कहना कि यदि संयंत्र किसी अन्य राज्य में स्थापित हुआ तो पूरा अतिरिक्त खर्च उत्तराखंड के उपभोक्ताओं पर आएगा, अपने आप में सही निष्कर्ष नहीं है। उपभोक्ताओं पर वास्तविक वित्तीय प्रभाव का आकलन कुल बिजली टैरिफ के आधार पर ही किया जाएगा।

*Fixed Charge की सीमा 70 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने का तथ्य*

प्रमुख सचिव ने बताया कि Model Bidding Document में Fixed Charge की सीमा 70 प्रतिशत निर्धारित थी। इसका अर्थ था कि कम से कम 30 प्रतिशत हिस्सा Fuel Charge के रूप में रहना आवश्यक था। बोलीदाताओं की वास्तविक लागत, ईंधन की उपलब्धता तथा विभिन्न संभावित स्थानों की परिस्थितियों को देखते हुए UPCL द्वारा Fixed Charge की सीमा 75 प्रतिशत किए जाने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे Fuel Charge को 25 प्रतिशत तक रखने की सुविधा मिल सके।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली की कीमत का मूल्यांकन केवल Fixed Charge के आधार पर नहीं होता, बल्कि Fixed Charge और Variable/Fuel Cost को मिलाकर बनने वाले कुल टैरिफ के आधार पर किया जाता है। इस प्रस्ताव की UERC द्वारा जांच और विचार-विमर्श के बाद इसे मंजूरी दी गई।

*Fixed Charge की सीमा बढ़ने का अर्थ उपभोक्ताओं पर स्वतः अतिरिक्त बोझ नहीं*

डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि Fixed Charge की सीमा 70 से बढ़कर 75 प्रतिशत होने का यह अर्थ नहीं है कि उपभोक्ताओं पर स्वतः अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ जाएगा। अंतिम भुगतान उस कुल टैरिफ पर निर्भर करेगा, जिस पर प्रतिस्पर्धी बोली प्राप्त होगी। यदि प्रतिस्पर्धा के परिणामस्वरूप कुल टैरिफ कम रहता है, तो केवल Fixed Charge की सीमा बढ़ने से उपभोक्ता दायित्व स्वतः नहीं बढ़ता। इसी व्यापक वित्तीय एवं तकनीकी पहलू को ध्यान में रखते हुए UERC ने प्रस्तावित बदलाव की जांच कर उसे मंजूरी दी है।

*पहली यूनिट 42 और दूसरी यूनिट 48 माह में उपलब्ध कराने की समयसीमा*

प्रमुख सचिव ने बताया कि राज्य की बिजली आवश्यकता को जल्द से जल्द पूरा करने के उद्देश्य से परियोजना के निर्माण की समयसीमा भी निर्धारित की गई है। 1320 मेगावाट क्षमता को चरणबद्ध रूप से उपलब्ध कराने के लिए पहली यूनिट के लिए 42 माह और दूसरी यूनिट के लिए 48 माह की समयसीमा रखी गई है। यह समयसीमा परियोजना निर्माण की तकनीकी और व्यावहारिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की गई है।

*UJVNL-THDC संयुक्त उपक्रम पर भी किया गया था विचार*

डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि 1320 मेगावाट बिजली की आवश्यकता को पूरा करने के लिए UJVNL और THDC के संयुक्त उपक्रम के विकल्प पर भी विचार किया गया था। हालांकि THDC, NTPC की सहायक कंपनी है और उसे NTPC की निर्धारित नीतियों का पालन करना होता है। THDC की मुख्य विशेषज्ञता जल विद्युत तथा Pumped Storage Projects के क्षेत्र में है। अन्य क्षेत्रों में विस्तार के लिए प्रमोटर की आवश्यक स्वीकृतियां भी जरूरी होती हैं। इन परिस्थितियों में प्रस्तावित Joint Venture को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। इसके बाद राज्य की दीर्घकालिक बिजली जरूरत को ध्यान में रखते हुए प्रतिस्पर्धी निविदा के माध्यम से बिजली खरीद का विकल्प अपनाया गया।

*25 वर्षों में लगभग ₹1.60–1.66 लाख करोड़ के संभावित भुगतान का अनुमान*

प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि 25 वर्षों के लिए लगभग ₹1.60 से ₹1.66 लाख करोड़ का उल्लेख कोई एकमुश्त भुगतान नहीं है, बल्कि 25 वर्षों की अवधि में होने वाले संभावित कुल भुगतान का अनुमान है। राज्य की भविष्य की बिजली आवश्यकता का आकलन Central Electricity Authority (CEA) की Resource Adequacy Study के आधार पर किया गया है।

उन्होंने कहा कि 1320 मेगावाट बेस-लोड बिजली की व्यवस्था इसी दीर्घकालिक आवश्यकता को ध्यान में रखकर की जा रही है। 25 वर्ष की अवधि का उद्देश्य राज्य को लंबे समय तक पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना है। वास्तविक भुगतान अंतिम टैरिफ, वास्तविक बिजली आपूर्ति, प्लांट की उपलब्धता तथा अनुबंध की अन्य शर्तों पर निर्भर करेगा।

*पूरी प्रक्रिया में नियामकीय निगरानी और पारदर्शिता*

प्रमुख सचिव ऊर्जा ने कहा कि पूरी प्रक्रिया में कंपनियों से प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का परीक्षण किया गया। RFQ और RFP दोनों चरणों में प्रस्तावित बदलावों को UERC के समक्ष रखा गया। UERC एक स्वतंत्र विद्युत नियामक संस्था है और उसके स्तर पर विस्तृत विचार-विमर्श एवं अनुमोदन के बाद ही संबंधित बदलावों को आगे बढ़ाया गया।

उन्होंने कहा कि इसलिए 1320 मेगावाट बिजली खरीद की प्रक्रिया को केवल विभागीय स्तर पर लिया गया निर्णय मानना उचित नहीं है। इसमें तकनीकी परीक्षण, बोलीदाताओं की प्रतिस्पर्धा, वित्तीय मूल्यांकन और स्वतंत्र नियामकीय संस्था की स्वीकृति जैसे विभिन्न चरण शामिल हैं।

डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि 1320 मेगावाट बिजली खरीद का मूल उद्देश्य किसी एक कंपनी को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि उत्तराखंड की भविष्य की बिजली जरूरत को सुरक्षित करना है। निविदा में प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का परीक्षण किया गया, आवश्यक बदलाव UERC के समक्ष रखे गए और आयोग की स्वीकृति के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। अंतिम चयन भी प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया को नियमों, प्रतिस्पर्धा, तकनीकी आवश्यकता और नियामकीय स्वीकृति के समग्र संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

NewsGrid Desk

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