उत्तराखंड

पीएम मोदी की ईंधन बचत की अपील, फिर भी उत्तराखंड में सरकारी गाड़ियों से स्कूल जा रहे ‘VIP बच्चे’

एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल बचाने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और ईंधन संरक्षण का संदेश दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर राजधानी देहरादून में सरकारी वाहनों के निजी उपयोग की तस्वीरें इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं।

शहर के कई बड़े निजी स्कूलों सेंट जोजेफ्स, कान्वेंट आफ जीजस एंड मैरी, ब्राइटलैंड, समरवैली, दून इंटरनेशनल, एशियन स्कूल, एन मैरी, सेंट थामस आदि स्कूलों के बाहर सुबह व छुट्टी के समय सरकारी नंबर प्लेट लगी गाड़ियां बच्चों को छोड़ने और लेने पहुंचती दिखाई देती हैं।

इनमें नेताओं, नौकरशाहों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के बच्चे पढ़ते हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब आम लोगों और सरकारी कर्मचारियों से ईंधन बचाने की अपील की जा रही है, तब सरकारी संसाधनों का निजी उपयोग आखिर कैसे उचित माना जाए? राजपुर रोड, जीएमएस रोड, ईसी रोड, सहारनपुर रोड और डालनवाला क्षेत्र स्थित कई प्रतिष्ठित स्कूलों के बाहर प्रतिदिन बड़ी संख्या में सरकारी वाहन देखे जा सकते हैं।

इनमें कुछ वाहन विभागीय स्टिकर और सरकारी नंबर प्लेट के साथ पहुंचते हैं। कई मामलों में ड्राइवर घंटों स्कूल के बाहर इंतजार करते भी नजर आते हैं।

एक तरफ अपील, दूसरी तरफ वीआइपी कल्चर

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से ईंधन बचाने और संसाधनों के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग की अपील की थी। इसके बाद कई सरकारी विभागों ने कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने और कारपूल व्यवस्था बढ़ाने के निर्देश भी जारी किए।

बुधवार को राज्य सरकार ने भी कर्मचारियों से सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक परिवहन से कार्यालय आने की पहल कर दी है। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकारी गाड़ियां निजी उपयोग में लगेंगी तो ईंधन बचत का संदेश जमीन पर कितना प्रभावी रह पाएगा?

 

ट्रैफिक और ईंधन दोनों पर बढ़ता दबाव

स्कूल टाइम में ट्रैफिक दबाव बढ़ने का एक बड़ा कारण निजी व सरकारी वाहनों की अत्यधिक आवाजाही भी है। कई बार एक बच्चे को छोड़ने के लिए अलग वाहन स्कूल पहुंचता है। यदि सरकारी वाहनों का उपयोग केवल अधिकृत सरकारी कार्यों तक सीमित रखा जाए और निजी उपयोग पर नियंत्रण हो तो इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि ट्रैफिक दबाव भी कम किया जा सकता है।

यह हैं नियम

प्रशासनिक नियमों के अनुसार सरकारी वाहनों का उपयोग केवल अधिकृत सरकारी कार्यों के लिए किया जाना चाहिए। निजी उपयोग या परिवार के सदस्यों के नियमित आवागमन के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल नियमों की भावना के विपरीत माना जाता है, जब तक कि संबंधित पद को विशेष अधिकृत सुविधा प्राप्त न हो।

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