https://www.facebook.com/UttarakhandDIPR
उत्तराखंडधार्मिक

देवी-देवताओं के संग मंडी में सजेगा ‘देव कुंभ’, गूंजेगा शाही शंखनाद;

हिमाचल प्रदेश की छोटी काशी के नाम से मशहूर मंडी शहर में इसका सबसे बड़ा महोत्सव, यानी अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव, जल्द ही सजने वाला है. इसे देव कुंभ भी कहा जाता है. इस महोत्सव के साथ कुछ पुरानी सभ्यताएं और परंपराएं भी जीवित रहती हैं, जो आज भी मंडी में पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती हैं. दरअसल, मंडी राजवंश द्वारा शिवरात्रि पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई थी. स्थानीय राजा द्वारा आस-पास के देवी-देवताओं को इस महोत्सव में आमंत्रित किया जाता था. समय के साथ भले ही बहुत कुछ बदल गया हो, लेकिन छोटी काशी में शुरू हुई यह सांस्कृतिक सभ्यता और भी समृद्ध होती गई.

आज यह परंपरा इतनी व्यापक हो चुकी है कि मंडी शिवरात्रि महोत्सव में 216 से ज्यादा देवी-देवता शामिल होते हैं. इन देवी-देवताओं के आदर-सत्कार की पूरी व्यवस्था अब जिला प्रशासन, मंडी द्वारा की जाती है.

निकाली जाती हैं शाही जलेब
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में सबसे बड़ा पद मंडी के राजा कृष्ण रूप माधव राय का होता है. उनके सम्मान में तीन शाही जलेब निकाली जाती हैं. इस जलेब (शाही जुलूस) में स्कूल के बच्चे, पुलिस बैंड, देवी-देवताओं की शोभायात्रा और राजा माधव राय की पालकी शामिल होती है. यह जुलूस राजमहल से निकलकर पड्डल मैदान (मेला स्थल) तक पहुंचता है. यह प्रक्रिया पुराने समय के शाही जुलूस की परंपरा पर आधारित है. अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव की शुरुआत, मध्य और समापन पर तीन शाही जलेब निकाली जाती हैं. अंतिम जलेब के साथ शिवरात्रि महोत्सव का औपचारिक समापन होता है.

इतिहासकार ने बताया महोत्सव का महत्व
यह रीति-रिवाज मंडीवासियों ने जिला प्रशासन की मदद से संजो कर रखे हैं. इसमें निरंतर व्यवस्थाएं सुदृढ़ होती जा रही हैं और हर साल इस महोत्सव को भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती. आकाश शर्मा के अनुसार, यह महोत्सव पुरानी संस्कृति को सहेजने का कार्य करता है. इसमें जिले भर से 216 से ज्यादा देवी-देवता भाग लेने पहुंचते हैं, जिनका आदर-सत्कार मंडीवासी सात दिनों तक करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

Advertisement
     

Related Articles

Back to top button