उत्तराखंड

युवाओं की स्किलिंग पर 200 करोड़, पहाड़ के कुक्कुट पालकों को दो करोड़ की सब्सिडी

उत्तराखंड राज्य गठन के करीब 26 साल बाद पहली बार देहरादून से बाहर चंपावत जिले के बनबसा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। बैठक में युवाओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने के लिए 200 करोड़ रुपये की योजना, पर्वतीय क्षेत्रों के कुक्कुट पालकों को दो करोड़ रुपये की सब्सिडी, पीजी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी और निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के नियमों में बदलाव समेत कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगाई गई।

कैबिनेट ने पर्वतीय क्षेत्रों के करीब दो हजार कुक्कुट पालकों को फीड पर लगभग दो करोड़ रुपये की सब्सिडी देने को मंजूरी दी। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में भेजी जाएगी। इससे पहाड़ में कुक्कुट पालन को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही पालकों की लागत कम करने में मदद मिलेगी।

डिग्री के साथ कौशल प्रशिक्षण, एक लाख से अधिक विद्यार्थियों को लाभ

युवाओं को शिक्षा के साथ रोजगार के लिए तैयार करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने 200 करोड़ रुपये की स्किल डेवलपमेंट योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत विद्यार्थियों को डिग्री के साथ कौशल आधारित पाठ्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। प्रत्येक सेमेस्टर में छह क्रेडिट के स्किल कोर्स संचालित किए जाएंगे। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और नई तकनीकों के साथ रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप अन्य कौशल भी शामिल होंगे।

उच्च शिक्षा विभाग के तहत स्किल डिप्लोमा कोर्स शुरू करने का भी निर्णय लिया गया है। इससे एक लाख से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के नियमों में बदलाव

कैबिनेट ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित नियमों में बदलाव को मंजूरी दी है। अब तक इसके लिए 10 एकड़ भूमि की आवश्यकता थी, जबकि नए प्रावधान के तहत 20 हजार वर्गमीटर भूमि में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने का रास्ता साफ होगा। इसके साथ ही पांच करोड़ रुपये के गारंटी फंड की अनिवार्यता समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।

पीजी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में होगा इजाफा

प्रदेश में पीजी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली है। इसके तहत कनिष्ठ और वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों को मिलने वाले मासिक स्टाइपेंड में इजाफा होगा। स्टाइपेंड को करीब 75 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये से अधिक किए जाने का निर्णय लिया गया है।

पशुपालन, मत्स्य और डेयरी विकास विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए डायरेक्टर जनरल के पद को अपग्रेड करने की मंजूरी भी दी गई। इसका उद्देश्य तीनों विभागों के कामकाज में तालमेल बढ़ाना और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।

कर्मचारियों की संपत्ति का विवरण लेने की व्यवस्था

कैबिनेट ने कर्मचारी आचरण नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत समूह क, ख और ग के कर्मचारियों से संपत्ति का विवरण लेने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) अधिकारी के पद को समूह ख में शामिल करने की मंजूरी दी गई।

टीडीसी के लिए 66 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को भी मंजूरी दी गई है। नजूल भूमि के नियमितीकरण के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसके दायरे में खटीमा, बनबसा और चंपावत भी शामिल होंगे। वन विभाग से संबंधित मामलों के तेजी से निस्तारण के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) गठित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। वहीं, टिहरी जिले के नरेंद्रनगर में नया सब-रजिस्ट्रार कार्यालय खोलने को भी मंजूरी दी गई।

जिलों में भी होंगी कैबिनेट बैठकें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार शासन को जनता के करीब ले जाने के लिए भविष्य में भी प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कैबिनेट बैठकें आयोजित करेगी। इससे स्थानीय समस्याओं, क्षेत्रीय जरूरतों और विकास की संभावनाओं को सीधे शासन के समक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्र भौगोलिक सीमा के साथ सुरक्षा, संस्कृति और विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। सरकार इन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं, रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। सीमांत गांवों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक संतुलित विकास सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

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